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हर रात एक नया promise... "Kal se pakka padhunga." लेकिन फिर वही सुबह... वही snooze... वही reels... वही excuses... और देखते ही देखते एक और दिन खत्म। ----- Sach batao... क्या तुम सच में पढ़ नहीं पा रहे... या फिर तुमने खुद को बहानों का इतना आदी बना लिया है कि अब मेहनत भारी लगने लगी है?...
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